Sat. Nov 28th, 2020
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अगर आपको 4जी नेटवर्क पाने के लिए एक कमरे से दूसरे कमरे और कभी-कभी छत पर भी जाना पड़ता है, तो इस खबर को पढ़कर आपका खून खौल उठेगा. नासा चंद्रमा पर 4जी नेटवर्क बिछाने की तैयारी कर रहा है और इसके लिए कंपनियों ने हामी भी भर दी है. आखिर माजरा क्या है. अभी धरती पर तो ढंग से 4जी मिल नहीं पा रहा है, तो चांद पर 4जी नेटवर्क की जरूरत क्यों पड़ गई? ऐसे ही सवालों के जवाब आइए जानते हैं आसान भाषा में.

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पहली बात- आखिर ये खुराफात कौन-सी कंपनी कर रही है

असल में नासा ने 2028 में चांद पर अपना ऐसा बेस स्टेशन बनाने का लक्ष्य रखा है, जिसमें इंसान रह सकें. मतलब ऐसा एक ठिकाना, जहां इंसान जाकर लंबे वक्त तक रह सके. इसके लिए नासा ने एक दर्जन से भी ज्यादा अलग-अलग कंपनियों को तकनीकी सहयोग देने के लिए 370 मिलियन डॉलर यानी तकरीबन 27 अरब रुपए का ठेका दे रखा है. इन तकनीकों में पावर जेनरेशन, रोबोटिक्स, अच्छे लैंडिंग पैड साथ ही 4जी नेटवर्क की कवरेज (हां, वहां लोगों को सेल्फी भी अपलोड करनी होगी) भी शामिल है.

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नासा चांद पर 4जी नेटवर्क सेट करने के लिए एक टेलीकॉम कंपनी और दूसरी हार्डवेयर यानी मशीनरी आदि बनाने वाली कंपनी को खोज रहा था. उनकी खोज खत्म हुई है दो कंपनियों पर. एक का नाम है वोडाफोन (इसके नेटवर्क की खूबी जानने के लिए नीचे का ट्वीट देखें) और दूसरी नोकिया. हां वही नोकिया, जिसने नोकिया 5110 और नोकिया 1100 जैसे जड़ीले मोबाइल बनाए थे. नोकिया मोबाइल बनाने के अलावा ऐसी बड़ी-बड़ी मशीनें भी बनाती है, जो मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध कराने में सहायता करती हैं.

आखिर चांद पर 4जी नेटवर्क की जरूरत ही क्या पड़ गई

तकरीबन 50 साल के बाद फिर से चांद पर हलचल इसलिए शुरू हो रही है, क्योंकि अब फिर से अमेरिका मून मिशन की तैयारी कर रहा है. नासा की वेबसाइट के अनुसार, 2024 में फिर से एस्ट्रोनॉट्स को चांद पर लैंड कराने का प्लान बना रहे हैं. इस बार लैंडिंग साउथ पोल पर होगी. इस लैंडिंग के लिहाज से भी इस तैयारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. 4जी नेटवर्क उपलब्ध हो जाने से चंद्रमा पर चलने वाली गाड़ी, जिसे रोवर कहते हैं और एस्ट्रोनॉट्स के बीच आपस में बात करना काफी आसान हो जाएगा.

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आपको लग सकता है कि चलो, अच्छा होगा. हम भी एस्ट्रोनॉट का नंबर जुगाड़ कर उसे चांद पर मिस कॉल मार सकेंगे. आप अपने खयाली घोड़ों को यही पर थाम लीजिए. आप अपने नोकिया फोन में वोडाफोन के नेटवर्क पर किसी भी एस्ट्रोनॉट को मिस कॉल नहीं मार सकेंगे. धरती से चांद के ट्रांसमिशन का इससे कुछ भी लेना-देना नहीं है. यह नेटवर्क सिर्फ मून-टु-मून कनेक्शन के लिए ही काम करेगा.

तो अब तक कैसे बात होती थी चांद पर

चांद पर सबसे पहले अमेरिकी एस्ट्रोनॉट नील आर्मस्ट्रॉन्ग और बज़ एल्ड्रिन 21 जुलाई, 1969 को उतरे. नील आर्मस्ट्रॉन्ग ने पहला कदम चांद पर रखा. इस विलक्षण घटना को व्यक्त करते हुए खुद नील आर्मस्ट्रॉन्ग ने कहा था-

यह इंसान के लिए भले चांद पर एक छोटा कदम है, लेकिन पूरी मानव जाति के लिए यह बहुत बड़ी छलांग है.

हालांकि जब नील और बज़ चांद पर उतरे थे, तब कम्यूनिकेशन के लिहाज से तकनीकी मामला काफी ढीला था. वहां रेडियो फ्रिक्वेंसी पर वॉकी-टॉकी टेक्नॉलजी से बात होती थी. मतलब रेडियो सिग्नल के सहारे. एक जन बोलता था, तो दूसरा सुनता था. आवाज साफ नहीं आती थी, रुक-रुककर भी आती थी. इसके अलावा यह पावर भी काफी लेता है. चूंकि धरती से इतनी दूर पावर ऑक्सीजन की तरह की जरूरी है, ऐसे में इसे बचाना भी बहुत जरूरी होता है. ऐसे में पूरे कम्यूनिकेशन सिस्टम को ही बदलने का काम शुरू किया जा रहा है.

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क्या यहां के 4जी से कुछ अलग होगा वहां का 4जी

तकनीकी रूप से इसे चौथी पीढ़ी (4th जनरेशन) का मोबाइल नेटवर्क ही माना जाएगा और इसकी स्पीड 100 MBPS से 1 GBPS तक की होगी. लेकिन इसके इंफ्रास्ट्रक्चर में जरूर बदलाव किया जाएगा. यह बदलाव चंद्रमा के मौसम और तापमान को देखते हुए किया जाएगा. चांद पर न तो कोई वातावरण है, न ही वहां पर तापमान पर कोई कंट्रोल है. मतलब पल में कड़ाके ठंडी और पल में बहुत गर्मी. इसके अलावा रेडिएशन का खतरा भी है, जिससे कम्यूनिकेशन पर असर पड़ सकता है. ऐसे में कंपनी को इस सारी दिक्कतों का तोड़ निकालकर ही वहां पर सेटअप लगाना पड़ेगा.

खर्चा कितने का आ रहा है

इस पूरे 4जी का सेटअप लगाने का जिम्मा नोकिया की बेल लैब ने लिया है. पूरे काम को खत्म करने के लिए 14.1 मिलियन डॉलर यानी तकरीबन 1 अरब रुपए का खर्चा आएगा. इसके अलावा वोडाफोन अपने नेटवर्क सर्विस के लिए अलग से चार्ज करेगा.

जानकारों का मानना है कि जिस तरह से ईलॉन मस्क की कंपनी स्पेस एक्स और ऑडी (जी हां, कार बनाने वाली कंपनी) प्राइवेट स्पेस क्राफ्ट के मिशन में जुटे हुए हैं, उससे आने वाले वक्त में चांद पर काफी हलचल देखने को मिल सकती है. इसे स्पेस टूरिज्म और साइंटिफिक रिसर्च के लिहाज से बड़े मार्केट की तरह भी देखा जा रहा है.

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