Mon. Nov 30th, 2020
आखिर क्या हैं scam 1992 की कहानी और जाने scam 1992 web series के बारे में

मुंबई: आजकल एक एक इंडियन वेब सीरीज की काफी चर्चाओ में हैं, scam 1992 on Sony liv. बहुत से लोग इस वेब सीरीज को देखकर अपनी-अपनी राय दे रहे और इसकी कहानी को लोगो को बता रहे हैं. पर अभी काफी लोगो को इसकी कहानी की कोई जानकारी नहीं हैं, तो आईये जानते Harshad mehta scam 1992 के बारे में..

Scam 1992 के पीछे की कहानी 

Scam 1992 के पीछे की कहानी

आजकल हर्षद मेहता की scam 1992 वेब सीरीज काफी चर्चे में इसमें उसकी असली कहानी के बारे में बताया गया हैं की कैसे एक मिडिल क्लास आदमी India Stocks Market का Big bull बन गया और कैसे उसने अपनी जिंदगी की शुरुवात की.

Scam 1992 web series review हिंदी में 

Scam 1992 web series review हिंदी में

scam 1992 web series की कहानी stock market के Big Bull कहे जाने वाले इंसान हर्षद मेहता की हैं. इस वेब सीरीज को IMDB पर 9.6/10 मिली हैं और 40,787 लोगो ने वोट किया हैं. जिन्होंने भारत के बैंको को 5000 करोड़ का चुना लगाया था. लेकिन सबसे पहले आपके दिमाग में आया होगा की आखिर ये काम उन्होंने किया कैसे था.

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दरअसल इसके पीछे उस समय के हमारे बैंको के नियमो में कमी के कारण हुआ था.हर्षद मेहता ने उस समय RF (Ready forward deal) की मदद ली थी. लेकिन ये RF होती क्या हैं.

RF (Ready forward deal)

RF (Ready forward deal)

इसमें होता कुछ यु हैं की हमारे देश की सरकार अपने योजनाओ और प्रोजेक्ट्स के खर्चे के कुछ सिक्योरिटीज निकालती हैं. जिन्हें गवर्मेंट सिक्योरिटीज कहते हैं. ये कई प्रकार की होती हैं. जिसमे Teasury Bills, Cash Management, Government Bond शामिल होते हैं. इन सब सिक्योरिटीज के बदले में सरकार बैंक और इन्वेस्टर से कुछ तय समय के कुछ पैसे लेती हैं और इन पैसो बदले में सरकार इन सबको ब्याज देती हैं. उस समय सभी बैंक और इन्वेस्टर्स को इन सिक्योरिटीज में इन्वेस्ट करना अनिवार्य होता था. अगर किसी बैंक को पैसे चाहिए होते थे तो वो बैंक अपनी सिक्योरिटीज को किसी दुसरे बैंक में गिरवी रख कर लोन ले लेते थे और बदले में उनको ब्याज देना होता था. इसी को RF (Ready forward deal) कहते थे.

कैसे किया Harshad Mehta ने  5000 करोड़ का घोटाला |Scam 1992

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इन सभी लेन-देन के काम को आसान करने के लिए बीच में कुछ दलालों का काम होता था जो सिक्योरिटीज को एक बैंक से दुसरे बैंक में लोन पर दिलवाने और देने का काम करते थे. इन दलालों में हर्षद मेहता भी उनमे से एक था. उन्होंने इस सिस्टम में कुछ कमी ढूंड ली थी. दरअसल वो जब भी किसी बैंक की सिक्योरिटीज के बदले दुसरे बैंक से पैसा लेते थे तो वो पैसा वो बैंक को देने की बजाये stock market में लगा देते थे. जिसके कारण उस कंपनी के stock की कीमत काफी तेज़ी से बढने लगती थी और जब पहला बैंक अपने सिक्योरिटीज का पैसा मांगते थे तो हर्षद मेहता किसी दुसरे बैंक से पैसालेकर उस बैंक को दे देते थे. इससे उनके पास हर समय करोड़ो रूपये रहते थे.

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उन्होंने इसके बाद जब उनको और पैसो  की जरूरत पड़ी तो उन्होंने उस समय होने वाली एक और खामी को ढूंड लिया. दरअसल उस समय सिक्योरिटीज और पैसे कि लेन-देन के लिए एक रसीद का प्रयोग होता था. हर्षद ने उस रसीद की डुप्लीकेट कॉपी बनवा ली और बैंक से खुब पैसे उठाए व जब लोन देने वाला बैंक अपना पैसा वापस मांगता तो वो शेयर market से हुए मुनाफे से उन पैसो को दे देते थे और अपनी दी हुई नकली रसीद को वापस ले लेता था. इसी तरह उन्होंने लगभग 5000 करोड़ का घोटाला था. जो उस समय के हिसाब से तो काफी जायदा था.

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उनकी इस घोटाले के बारे में शुचेता दलाल ने अपने एक आर्टिकल में लिखा था और अच्छे से बताया था की कैसे जब भारत में जब मंडी का दोर आया तब से पहले से लेकर अब तक इन्होने कितना बड़ा घोटाला किया हैं. बाद में हर्षद मेहता को ऊपर केस चले तो 2001 में उनकी मौत हो गयी.

shucheta

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Credit: Live Hindi Facts

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