Mon. Oct 26th, 2020
कल मैंने खुशियों को दफ़नाया था ||BY Stark Kaaraan

कल मैंने खुशियों को दफ़नाया था,
आज मेरी आखिरी उम्मीद ने भी दम तोड़ दिया।

रोज़ क़फन चढ़ाए जाते हैं मेरी हसरतों पर ,
रोज़ मौत का मंज़र नज़र आता है।

कल को शायद ये खबर सुर्खियों में हो
कि मेरी परछाई ने भी मेरा साथ छोड़ दिया।

लगातार मौसम का मिज़ाज बदल रहा है
बारिश भी होने वाली है।

कातिल खड़ा है दहलीज़ पे खंज़र लिए
शायद एक और मौत होने वाली है।

खुन से सने चेहरों पर ना गिले हैं , ना शिकवे हैं।
रहम करो कातिलों , अब तो कफ़न भी महंगे हो चले हैं।


Stark…

mmm
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