Sat. Nov 28th, 2020
पुलिस का लाठीचार्ज, केंद्र के कृषि अध्यादेशों के खिलाफ हरियाणा में सड़कों पर उतरे किसान

हरियाणा: कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच जहां सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए हरियाणा व पंजाब समेत कई राज्यों ने भीड़ को रोकने के लिए धारा 144 लगाई हुई है। वहीं, हरियाणा के कुरुक्षेत्र से सटे स्थित पिपली में गुरुवार को विरोध प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतरे हजारों किसानों ने करीब तीन घंटे जीटी रोड जाम रखा।

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किसानों के साथ विरोध प्रदर्शन में कुरुक्षेत्र के कांग्रेस नेता अशोक अरोड़ा कांग्रेस के कई विधायकों के साथ शामिल हुए। भीड़ हटाने के लिए पुलिस द्वारा इन प्रदर्शनकारी किसानों पर हुए लाठीचार्ज के मामले ने तूल पकड़ लिया है। लाठीचार्ज के जवाब में पुलिस पर पत्थर फेंके गए जिसमें कई लोग घायल हो गए।

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भारतीय किसान यूनियन ने केंद्र सरकार को कृषि अध्यादेशों को वापस लिए जाने के लिए 4 दिन का समय दिया है। किसानों ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी तो 15 सितंबर से धरने व 20 सितबर को प्रदेशभर में सड़कें जाम की जाएंगी।

केंद्र के कृषि अध्यादेशों का विरोध कर रहे किसानों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में विपक्ष दल कांग्रेस व इनेलो ने हरियाणा की भाजपा-जजपा सरकार को घेरा है। शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री एंव विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कांग्रेस की प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा और कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने पिपली पहुंच कर लाठीचार्ज का शिकार हुए किसानों से मुलाकात की है।

कृषि में सुधार के लिए केंद्र सरकार की ओर से जारी 3 अध्यादेशों के खिलाफ पिपली में भारतीय किसान यूनियन, 17 किसान संगठनों, आढ़तियों द्वारा बुलाई गई ‘किसान बचाओ-मंडी बचाओ’ रैली में हुए हंगामे पर विरोध जताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को नहीं दबाया जा सकता।

उन्होंने कहा कि कोरोना काल में किसान विरोधी 3 अध्यादेश लाकर केंद्र सरकार ने किसानों को सड़कों पर उतरने को मजबूर किया है। हुड्डा ने कहा कि एमएसपी की गारंटी के बिना कोई अध्यादेश किसानों के हित में कैसे हो सकता है। किसान सड़कों पर न उतरे इसके लिए केंद्र सरकार को किसानों को उनकी फसलों के एमएसपी की गारंटी देनी होगी।

किसानों पर लाठीचार्ज के विरोध में भारतीय किसान यूनिचन के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि किसानों की एक माह से तैयारी चल रही थी। उकनी मांगों को लेकर सरकार ने कोई बात नहीं की। रैली पर रोक लगाई पर जीटी रोड पर जाम लगाने के बाद ही रैली की इजाजत दी गई। इधर गृह मंत्री विज का कहना है कि पुलिस ने संयम से काम लिया है।

पुलिस यह चाह रही थी कि सड़क न रोकी जाए, क्योंकि कोरोना की वजह से एंबुलेंस की आवाजाही बाधित हो रही थी। धरना-प्रदर्शन सभी का अधिकार है, लेकिन कोरोना महामारी के चलते इसके दिशानिर्देशों का पालन करना अनिवार्य है। इधर हरियाणा के कृषि मंत्री जयप्रकाश दलाल का कहना है कि प्रदर्शन में किसान नहीं, कांग्रेस कार्यकर्ता थे। अध्यादेश किसानों के हित में हैं। आमदनी बढ़ेगी। मंडियां बंद नहीं होगी। किसानों के अनाज का दाना-दाना खरीदा जाएगा। उन्होंने बताया कि आज वे वेबिनार के जरिए किसानों-आढ़तियों को इनकी जानकारी देंगे।

तीन अध्यादेश क्या हैं?

मई में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 में एक COVID-19 राहत उपाय के हिस्से के रूप में एक संशोधन पेश किया। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जून में इसे पारित किया और अब यह एक अध्यादेश है। हालाँकि, आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 आगामी सत्र में संसद द्वारा मंजूरी नहीं मिलने पर चूक जाएगा।

संशोधित अधिनियम के तहत अनाज, दालें, खाद्य तेल और चीनी जैसे आवश्यक खाद्य पदार्थों को निष्क्रिय कर दिया जाएगा। सीधे शब्दों में, उपरोक्त वस्तुओं के लिए कोई भंडारण सीमा या आंदोलन प्रतिबंध नहीं होगा। केवल आपातकालीन परिस्थितियों में, जैसे कि प्राकृतिक आपदा जब उत्पादन गिरता है, तो स्टॉक पर सीमाएं लगाई जाएंगी। किसान उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश के तहत, व्यापारियों को उसी दिन या अधिकतम तीन कार्य दिवसों के भीतर किसानों को अनिवार्य रूप से भुगतान करना होगा।

यह मंडियों के बाहर किसानों की उपज के अंतर-राज्य और अंतर-राज्य व्यापार की अनुमति देता है। अध्यादेश “अनुसूचित किसानों की उपज” के इलेक्ट्रॉनिक व्यापार को “व्यापार क्षेत्र” में भी अनुमति देता है।

“व्यापार क्षेत्र” को धारा 2 (एम) के तहत परिभाषित किया गया है, जैसे – “किसी भी क्षेत्र या स्थान, उत्पादन का स्थान, संग्रह और एकत्रीकरण जिसमें – खेत का द्वार; कारखाना परिसर; गोदामों; भूमिगत कक्ष; ठंड भंडारण; या किसी अन्य संरचना या स्थान, जहां से किसानों की उपज का व्यापार किया जा सकता है … ”एपीएमसी मंडियों और निजी बाजार के यार्डों को व्यापार क्षेत्र की परिभाषा से बाहर रखा गया है।

मूल रूप से, इसका उद्देश्य कृषि उपज बाजार समितियों (एपीएमसी) के एकाधिकार को समाप्त करना है और किसी को भी कृषि उपज खरीदने और बेचने की अनुमति देना है। अध्यादेश के तहत प्रावधानों का पालन नहीं करने पर एक व्यक्ति को 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। मूल्य आश्वासन और फार्म सेवा अध्यादेश पर किसानों (सशक्तीकरण और संरक्षण) समझौते से किसानों को निजी खिलाड़ियों को अपनी कृषि उपज बेचने की अनुमति मिलती है।

यदि कोई व्यवसाय किसानों को समय पर भुगतान करने में विफल रहता है तो यह अध्यादेश एक दंड को भी आकर्षित करता है।

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 केंद्र सरकार से किसानों की प्रमुख मांगे:

–    केंद्र के तीनों अध्यादेशों को वापस लिया जाए।

–    संसद में एमएसपी गारंटी कानून पास किया जाए।

–    किसानों को आढ़तियों की मार्फत ही भुगतान हो।

–    सभी किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा।

इस घटना कि निन्दा करते हुए हरियाणा के कवि Khoji Roohdaar ने कहा

पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने दिया सरकार को दस दिन का अल्टीमेटम

पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि किसानों के खिलाफ मुकदमे ले वापिस, नहीं तो करेंगे आंदोलन। ये आंदोलन किसानों का है, हम किसान के साथ खड़े हैं। सरकार ने किसान पर लाठी चला कर पाप किया है। जिस सरकार ने किसान पर लाठी गीली बरसाई वो ज़्यादा दिन नहीं टिक पाई। कोरोना काल के बाद 10 लाख लोगों को इकट्ठा करके पीपली में ही आंदोलन करेंगे।
हम कानून को मानने वाले लोग हैं, लेकिन महामारी के बाद सरकार को दिखाएंगे कि आंदोलन क्या होता है।

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